Hindi Poem for Class 6 | कक्षा 6 के लिए हिंदी कविता

Through this poem, we give a message to the children that Hindi language is very important for them and they should understand and learn it. Apart from this, through this poem, we also teach children about the ideals that a good boy or girl should have. Hindi Poem for Class 6 this poem tells them about good behavior, manners, understanding and healthy state of mind both in their school and at home. In short, this poem enables children to move forward in their lives with a full cultural experience.

Hindi Poem for Class 6

Hindi Poem for Class 6

Today we have brought before you a very beautiful Hindi poem, which has been made for children. This poem teaches children about values, ethics and good manners. Hindi Poem for Class 6 this poem is a part of our culture and heritage which we should always cherish. so let’s start the poem

Hindi Poem for Class 6 for Kids

1. गुड़िया

मेले से लाया हूँ इसको
छोटी सी प्यारी गुड़िया,
बेच रही थी इसे भीड़ में
बैठी नुक्कड़ पर बुढ़िया।

मोल-भाव करके लाया हूँ
ठोक-बजाकर देख लिया,
आँखें खोल मुँद सकती है
वह कहती है पिया-पिया।

जड़ी सितारों से है इसकी
चुनरी लाल रंग वाली,
बड़ी भली हैं इसकी आँखें
मतवाली काली-काली।

ऊपर से है बड़ी सलोनी
अंदर गुदड़ी है तो क्या?
ओ गुड़िया तू इस पल मेरे
शिशुमन पर विजयी माया।

रखूंगा मैं तुझे खिलौनों की
अपनी अलमारी में,
कागज़ के फूलों की नन्हीं
रंगारंग फुलवारी में।

नये-नये कपड़े-गहनों से
तुझको रोज़ सजाऊँगा,
खेल-खिलौनों की दुनिया में
तुझको परी बनाऊँगा।

….कुवर नारायण

2. प्रकृति से प्रेम करें

Hindi Poem for Class 6

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें,
भूमि मेरी माता है,
और पृथ्वी का मैं पुत्र हूं।

मैदान, झीलें, नदियां, पहाड़, समुंद्र,
सब मेरे भाई-बहन है,
इनकी रक्षा ही मेरा पहला धर्म है।

अब होगी अति तो हम ना सहन करेंगे,
खनन-हनन व पॉलीथिन को अब दूर करेंगे,
प्रकृति का अब हम ख्याल रखेंगे।

हम सबका जीवन है सीमित,
आओ सब मिलकर जीवन में उमंग भरे,
आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

प्रकृति से हम है प्रकृति हमसे नहीं,
सब कुछ इसमें ही बसता,
इसके बिना सब कुछ मिट जाता।

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

….नरेंद्र वर्मा

3. ध्वनि

अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसंत-

अभी न होगा मेरा अंत।
हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।

मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर।

पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,
द्वार दिखा दूँगा फिर उनको।

हैं मेरे वे जहाँ अनंत-
अभी न होगा मेरा अंत।

….सूर्यकांत त्रिपाठी

Hindi Poem for Class 6 on Nature

4. चल तू अकेला

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए,
तो तू चल अकेला,
चल अकेला, चल अकेला,

चल तू अकेला।
तेरा आह्वान सुन कोई ना आए
तो चल तू अकेला,

जब सबके मुंह पे पाश।
ओरे ओरे ओ अभागी
सबके मुंह पे पाश,

हर कोई मुंह मोड़के बैठे,
हर कोई डर जाय!
तब भी तू दिल खोलके,

अरे जोश में आकर
मनका गाना गूंज तू अकेला।
जब हर कोई वापस जाय,

ओरे ओरे ओ अभागी
हर कोई बापस जाय।
कानन-कूचकी बेला पर

सब कोने में छिप जाय।

….रवीन्द्रनाथ ठाकुर

5. दीवानों की हस्ती

हम दीवानों की क्या हस्ती,
हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले,
मस्ती का आलम साथ चला,
हम धूल उड़ाते जहाँ चले।

आए बनकर उल्लास अभी,
आँसु बनकर बह चले अभी,
सब कहते ही रह गए, अरे,
तुम कैसे आए, कहाँ चले?

किस ओर चले? यह मत पूछो,
चलना है, बस इसलिए चले,
जग से उसका कुछ लिए चले,
जग को अपना कुछ दिए चले,

दो बात कही, दो बात सुनी;
कुछ हँसे और फिर कुछ रोए।
छककर सुख-दूख के घूँटों को
हम एक भाव से पिए चले।

हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले
हम एक निसानी-सी उर पर,
ले असफलता का भार चले।

अब अपना और पराया क्या?
आबाद रहें रुकने वाले।
हम स्वयं बँधे थे और स्वयं
हम अपने बंधन तोड़ चले।

….भगवतीचरण वर्मा

6. तुम मन की आवाज सुनो

तुम मन की आवाज सुनो
जिंदा हो, ना शमशान बनो,
पीछे नहीं आगे देखो
नई शुरुआत करो।

मंजिल नहीं, कर्म बदलो
कुछ समझ ना आए,
तो गुरु का ध्यान करो
तुम मन की आवाज सुनो।

लहरों की तरह किनारों से टकराकर
मत लौट जाना फिर से सागर,
साहस में दम भरो फिर से
तुम मन की आवाज सुनो।

सपनों को देखकर आंखें बंद मत करो
कुछ काम करो,
सपनों को साकार करो
तुम मन की आवाज सुनो।

इम्तिहान होगा हर मोड़ पर
हार कर मत बैठ जाना किसी मोड़ पर,
तकदीर बदल जाएगी अगले मोड़ पर
तुम अपने मन की आवाज सुनो।

….नरेंद्र वर्मा

Hindi Poem for Class 6 Students

7. ओस

Hindi Poem for Class 6

हरी घास पर बिखेर दी हैं
ये किसने मोती की लड़ियाँ?
कौन रात में गूंथ गया है
ये उज्ज्वल हीरों की कड़ियाँ?

जुगनू से जगमग जगमग ये
कौन चमकते हैं यों चमचम?
नभ के नन्हें तारों से ये
कौन दमकते हैं यों दमदम?

लुटा गया है कौन जौहरी
अपने घर का भरा खज़ाना?
पत्तों पर, फूलों पर, पग पग
बिखरे हुए रतन हैं नाना।

बड़ सबेरे मना रहा है
कौन खुशी में यह दीवाली?
वन उपवन में जला दी है
किसने दीपावली निराली?

जी होता, इन ओस कणों को
अंजलि में भर घर ले आऊँ?
इनकी शोभा निरख निरख कर
इन पर कविता एक बनाऊँ।

….सोहनलाल द्विवेदी

8. सितंबर शिक्षक दिवस पर,

करें गुरू का गान।
ज्ञान चक्षु को खोल हमारे,
मिटा दिया अज्ञान।।

जला ज्ञान का दीप हमारा,
मार्ग किया आसान।
अंतर्मन को सहला सहला,
गढ़ें नया इंसान।।

गुरू आज्ञा शिरोधार्य हो,
रखें उनका मान।
अपना जीवन धन्य बना लें,
लें उनका वरदान।।

धरती पर ही स्वर्ग बना लें,
गुरू का करके ध्यान।
अर्पित हो गुरू चरणों में जीवन,
ऐसे कर लें काम।।

भेदभाव और ऊंच-नीच का,
रहने न दें नाम।
ऐसे गुरु को आज करें ह म,
कोटि-कोटि प्रणाम।।

….श्यामा देवी

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9. उठ किसान ओ

उठ किसान ओ, उठ किसान ओ,
बादल घिर आए हैं
तेरे हरे-भरे सावन के
साथी ये आए हैं।

आसमान भर गया देख तो
इधर देख तो, उधर देख तो
नाच रहे हैं उमड़-घुमड़ कर

काले बादल तनिक देख तो
तेरे प्राणों में भरने को
नये राग लाए हैं

यह संदेशा लेकर आई
सरस मधुर, शीतल पुरवाई
तेरे लिए, अकेले तेरे।

लिए, कहाँ से चल कर आई
फिर वे परदेसी पाहुन, सुन,
तेरे घर आए हैं।

उड़ने वाले काले जलधर
नाच-नाच कर गरज-गरज कर
ओढ़ फुहारों की सित चादर

देख उतरते हैं धरती पर।
छिपे खेत में, आँखमिचौनी
सी करते आए हैं।

हरा खेत जब लहराएगा
हरी पताका फहराएगा
छिपा हुआ बादल तब उसमें

रूप बदल कर मुसकाएगा
तेरे सपनों के ये मीठे
गीत आज छाए हैं

….त्रिलोचन

Hindi Poetry for Class 6

10. विद्या देते दान गुरूजी

विद्या देते दान गुरूजी ।
हर लेते अज्ञान गुरूजी ॥

अक्षर अक्षर हमें सिखाते ।
शब्द शब्द का अर्थ बताते ॥

कभी प्यार से कभी डाँट से,
हमको देते ज्ञान गुरूजी ॥

जोड़ घटाना गुणा बताते ।
प्रश्न गणित के हल करवाते ॥

हर गलती को ठीक कराते,
पकड़ हमारे कान गुरूजी ॥

धरती का भूगोल बताते ।
इतिहासों की कथा सुनाते ॥

क्या कब क्यों कैसे होता है,
समझाते विज्ञान गुरूजी ॥

खेल खिलाते गीत गवाते ।
कभी पढ़ाते कभी लिखाते ॥

अच्छे और बुरे की हमको,
करवाते पहचान गुरूजी ॥

….शिव नारायण सिंह

11. आषाढ़ का पहला दिन

हवा का जोर वर्षा की झड़ी,
झाड़ों का गिर पड़ना।
कहीं गरजन का जाकर दूर,

सिर के पास फिर पड़ना।
उमड़ती नदी का खेती की,
छाती तक लहर उठना।

ध्वजा की तरह बिजली का,
दिशाओं में फहर उठना।
ये वर्षा के अनोखे दृश्य,

जिसको प्राण से प्यारे।
जो चातक की तरह तकता है,
बादल घने कजरारें।

जो भूखा रहकर,
धरती चीरकर जग को खिलाता है।
जो पानी वक्त पर आए,

नहीं तो तिलमिलाता हैं।
अगर आषाढ के पहले दिवस के
प्रथम इस क्षण में।

वही हलधर अधिक आता है,
कालिदास से मन में
तो मुझको क्षमा कर देना।

….भवानी प्रसाद मिश्र

12. बच्चों के भविष्य को

बच्चों के भविष्य को,
शिक्षक सजाता है।

ज्ञान के प्रकाश को,
शिक्षक जलाता है।

सही-गलत के फर्क को,
शिक्षक बताता है।

शिष्यों को सही शिक्षा,
शिक्षक ही दे पाता है।

ऊंचे शिखर पर शिष्य को,
शिक्षक ही चढ़ाता है।

बच्चों के भविष्य में,
और निखार लाता है।

शिष्य को कभी शिक्षक,
नहीं ढाल बनाता है।

असफल होते जब कार्य में,
अफसोस जताता है।

शिक्षक ही समाज का,
उत्तम जो ज्ञाता है।

….शम्भू नाथ

Poem for Class 6 in Hindi

13. घर की याद

आज पानी गिर रहा है,
बहुत पानी गिर रहा है,
रात-भर गिरता रहा है,
प्राण मन घिरता रहा है,

अब सवेरा हो गया है,
कब सवेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना,
बहुत सोकर सिर्फ़ माना—

क्योंकि बादल की अँधेरी,
है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब,
रातवाली छाप है सब,

गिर रहा पानी झरा-झर,
हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर,
काँपते हैं प्राण थर-थर,

बहुत पानी गिर रहा है,
घर नज़र में तिर रहा है,
घर कि मुझसे दूर है जो,
घर ख़ुशी का पूर है जो,

घर कि घर में चार भाई,
मायके में बहिन आई,
बहिन आई बाप के घर,
हायर रे परिताप के घर!

आज का दिन दिन नहीं है,
क्योंकि इसका छिन नहीं है,
एक छिन सौ बरस है रे,
हाय कैसा तरस है रे,

….भवानीप्रसाद मिश्र

14. सर को कैसे याद पहाड़े

Hindi Poem for Class 6

सर को कैसे याद पहाड़े?
सर को कैसे याद गणित?
यह सोचती है दीपाली
यही सोचता है सुमित।।

सर को याद पूरी भूगोल
कैसे पता कि पृथ्वी गोल?
मोटी किताबें वे पढ़ जाते?
हम तो थोड़े में थक जाते।।

तभी बोला यह गोपाल
जिसके बड़े-बड़े थे बाल
सर भी कभी तो कच्चे थे
हम जैसे ही बच्चे थे।।

पढ़-लिखकर सब हुआ कमाल
यूँ ही सीखे सभी सवाल
सचमुच के जादूगर हैं
इसीलिए तो वो सर हैं।।

….प्रतीक सोलंकी

15. है शान निराली इस देश की

है शान निराली इस देश की,
पहचान निराली इस देश की।

भारत माँ की रक्षा करता,
हिमालय इसका दुर्ग है।

है भारत माँ का मस्तक,
कश्मीर इसका स्वर्ग है।

गंगा-जमुना सी नदियाँ यहाँ,
कल-कल करती रहती है।

तन-मन को पावन करती,
धरती को अमृत देती हैं।

त्यौहारों के इस देश में,
रंग-रंग के नज़ारें हैं।

कभी दीवाली, कभी ईद,
कभी होली में रंगों की बहार हैं।

पतित पावनी है धरा यहाँ की,
महापुरुषों ने यहां जन्म लिया।

सावित्री और सीता जैसी,
नारियों ने यहाँ पुरुषार्थ किया।

हर भारतवासी का यहाँ,
एक सपना है।

बने सुदृढ़ और सफल देश,
ये संकल्प अपना है।

है शान निराली इस देश की,
पहचान निराली इस देश की।

….निधि अग्रवाल

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