18+ Hindi Poem for Class 2 pdf

Hindi Poem for Class 2

Through this poem, we give a message to the children that Hindi language is very important for them and they should understand and learn it. Apart from this, through this poem, we also teach children about the ideals that a good boy or girl should have. Hindi Poem for Class 2 this poem tells them about good behavior, manners, understanding and healthy state of mind both in their school and at home. In short, this poem enables children to move forward in their lives with a full cultural experience.

Hindi Poem for Class 2 with Moral

Today we have brought before you a very beautiful Hindi poem, which has been made for children. This poem teaches children about values, ethics and good manners. Hindi Poem for Class 2 this poem is a part of our culture and heritage which we should always cherish. so let’s start the poem

1.चिड़ियाघरHindi Poem for Class 2 Students

मैंने देखा चिड़ियाघर,
वहां थे बहुत से बंदर।

देखा एक भयानक शेर,
उसके चारों ओर था घेर।

थे अनेक हरियल तोते,
आंखें झपक-झपक सोते।

पंख फैलाये देखा मोर,
नाच रहा था जोर-जोर।

2.सूरज दादा

Hindi Poem for Class 2

सूरज दादा, सूरज दादा,
क्यों इतना गरमाते हो।

हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा,
क्यों इतना गुस्साते हों।

सोकर उठते जब खटिया से,
तुमको शीश नवाते हैं।

हँसी-खुशी सारा दिन बीते,
ऐसा रोज मनाते हैं।

दिन भर तुम इतना तपते,
गरम तमाचे जड़ देते हो।

पशु-पक्षी व जीव जगत भी,
व्याकुल सबको कर देते हो।

वर्षा का जब मौसम आता,
ओट बादलों की ले लेते हो।

उमड़-घुमड़ जब वर्षा होती,
आसमान में खो जाते हो।

जाड़े में तुम बच्चे बन,
सबको प्यारे लगते हो।

हम भी बैठ खुले आँगन में,
तुमसे बाते करते हैं।

शाम ढले तुम चल देते हो,
हम कमरों में छिप जाते हैं।

ओढ़ रजाई ऊपर से हम,
दुबक बिस्तरों में जाते हैं।

3. तितलीHindi Poem for Class 2 competition

तितली रानी तितली रानी,
फूलों की हो तुम महारानी।

फूलों में छिप जाती हो,
सबके मन को भाती हो।

कभी ना मेरे घर आती हो,
फूलों पर मंडराती हो।

फूलों का रस पी जाती हो,
कितना सुन्दर रूप तुम्हारा।

सबके मन को भाती हो,
कितनी भी कर ले कोशिश,
पर हाथ किसी के न आती हो।

…प्रीती कुमारी

4. मीठे आम

सुन्दर, सुन्दर मीठे आम,
अच्छे, अच्छे, प्यारे आम।

नहीं आम-सा कोई फल,
खाओ इन्हें न छोड़ो कल।

पके, गले, मुस्काते आम,
मिलते ढ़ेरों सस्ते आम।

लगड़ा, सेंदुरिया-मद्रासी,
बम्बइया, तुकमी, बनारसी।

रस से भरे दशहरी आम,
खाओ अभी छोड़ सब काम।

बुला रहे आमों के बाग,
बीने इनको तड़के जाग।

महकें बहुत सफेद आम,
बच्चे देख रहे जी थाम।

कोयल कूके अम्बुआ डाल,
आम तोड़कर धर दें पाल।

खाते नित जो प्यारे आम,
वे पाते फल चारों धाम।

कौन नहीं जो खाता आम,
किसे नहीं है भाता आम।

तृप्ति और सुख मिले तमाम,
तेरे सुने हजारों नाम।

सुन्दर, सुन्दर मीठे आम,
अच्छे, अच्छे प्यारे आम।

….डॉ. चक्रधर नलिन

5. प्यार के पंछी– Hindi Poem for Class 2 With Pictures

Hindi Poem for Class 2

नन्हे – नन्हे प्यारे पंछी,
लगते सबसे न्यारे पंछी।

फुदक – फुदक कर आते पंछी,
खटपट से उड़ जाते पंछी।

ची-ची, चूं-चूं करते पंछी,
रंग रंगीले न्यारे पंछी।

कभी पेड़ पर, कभी गगन में,
उड़ते और मंडराते पंछी।

छत पर दाना डालो तो,
झट से फिर आ जाते पंछी।

डरते-डरते दाना चुगते,
फुर से फिर उड़ जाते पंछी।

लाल – हरे, नीले औ पीले,
मेरे बड़े दुलारे पंछी।

…..मुकेश कुमार ऋषि

6. बन्दर मामा

रौब से निकले बन्दर मामा,
आज सिलाऊं मस्त पैजामा।

मल-मल कर उसको धुलवाऊं,
पानी छिड़क इस्त्री करवाऊं।

सेंट लगा ससुराल जाऊं,
ताम-झाम अपना दिखलाऊं।

रात तक पहुंचे ससुराल,
सबने पूछे उनके हाल।

सासू ने पकवान बनाए,
मिल बांट सबने खाए।

सुबह बीवी की करा विदाई,
शाम को घर लौट आए भाई।

….अरुण यादव

7. शिक्षक

शिक्षक हमें पढ़ाते है।
योग्य हमें बनाता है।

नई सीख हमें सिखाते है।
दुःख सुख में साथ निभाते है।

उपयोगी ज्ञान दिलाते हैं।
स्वादिष्ट भोजन हमें खिलाते है।

पोशाक, जूता और
मोजा, बैग दिलाते है।

हफ्ते हफ्ते में दूध
और फल खिलाते है।

शिक्षक हमें पढ़ाते है।
योग्य हमें बनाते है।

….अंजली

8. काश हमारे भी पंख होते– Short Hindi Poem for Class 2 Ncert

Hindi Poem for Class 2

काश हमारे भी पंख होते
पंछियों की तरह उड़ते,

काश हमारे पंख होते |
बस,कार, रेल, जहाज की जरूरत नहीं होती,

काश हमारे पंख होते |
मिनटों मे आसमाँ छू लेते,

काश हमारे पंख होते |
ना होता प्रकृति को नुकसान,

काश हमारे पंख होते |
क्या फिर भी होती कोई सीमाएं,

काश हमारे पंख होते |
काश हमारे पंख होते,

काश हमारे पंख होते !!

9. कागज की नावHindi Poem for Class 2

प्यारी-सी नाव चली,
लेकर पतवार चली,

हिचखोले खाती चली।
बलखाते, इठलाते चली,

पत्तों के मेड़ों से मिली।
घासों के पहाड़ों से हिली,

रिमझिम फुहारों से डरी।
मौसमी थपेड़ों से गिरी,

गिरकर फिर खड़ी हुई।
कागज की नाव चली।

….किसलय हर्ष

10. वो है मेरी माँ

मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव

ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती

गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो

हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती

ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।

….देवी नांगरानी

11. प्यारी प्यारी मेरी माँHindi Poem for Class 2 on Mother

प्यारी प्यारी मेरी माँ
सारे जग से न्यारी माँ…

लोरी रोज सुनाती है,
थपकी दे सुलाती है….

जब उतरे आगन में धुप,
प्यार से मुझे जगाती है….

देती चीजे सारी माँ,
प्यारी प्यारी मेरी माँ….

ऊँगली पकड़ चलाती है,
सुबह-शाम घुमाती है….

ममता भरे हुए हातो से,
खाना रोज खिलाती है….

देवी जैसी मेरी माँ,
सारी जग से न्यारी माँ….

प्यारी प्यारी मरी माँ
प्यारी प्यारी मेरी माँ…

12. जमीन पर जन्नत (माँ)

Hindi Poem for Class 2

जमीन पर जन्नत मिलती है कहाँ
दोस्तों ध्यान से देखा करो अपनी माँ

जोड़ लेना चाहे लाखों करोड़ो की दौलत
पर जोड़ ना पाओगे कभी माँ सी सुविधा

आते हैं हर रोज फरिश्ते उस दरवाजे पर
रहती है खुशी से प्यारी माएं जहाँ जहाँ

छिन लाती है अपनी औलाद की खातिर खुशियाँ
कभी खाली नही जाती माँ के मुहं से निकली दुआ

वो लोग कभी हासिल नही कर सकते कामयाबी
जो बात बात पर माँ की ममता में ढूँढते है कमियां

माँ की तस्वीर ही बहुत,बड़े से बड़ा मन्दिर सजाने को
माँ से सुंदर दुनिया में नही होती कोई भी प्रतिमा

माँ का साथ यूँ चलता है ताउम्र आदमी संग
जैसे कदमों तले झुका रहता हो सदा आसमां

माँ दिखती तो है जिस्म के बाहर सदा
पर माँ है रूह में मौजुद बेपनाह होंसला

कभी गलती से भी बुरा ना सोचना माँ के बारे में
ध्यान रहे माँ ने ही रचा हर जीवन का घोंसला

मर कर भी बसी रहती है माँ धरती पर ही अ नीरज
कभी नही होता औलाद की खातिर उसके प्रेम का खात्मा

…..नीरज रतन बंसल ‘पत्थर’

13. मैया मोरी याद तोरी

ओ माँ तेरी याद हमेशा,
पल–पल मुझको आती है ।

जब किसी माँ बच्चे को देखू,
ममता तेरी याद आती है ।।

तेरी ही कोख से,
इस दुनिया में आई हूं ।

तेरे ही सीखलाई से,
कदमों पर चल पाई हूं ।।

जीवन की हर मुश्किल में,
संग तेरा साया पाया था ।

थक कर जब घर लौटी मैं,
तूने सिर सहलाया था ।।

मेरी खातिर जाने कितनी,
रातों की नींद गवाई थी ।

मेरे हर एक घाव पर,
प्यार का मरहम लगाई थी ।।

तेरी चुड़ियों की मधुर खनक,
कानों को अब तक याद है ।

तेरी एक–एक याद से,
पल–पल मेरा आबाद है ।।

तेरी ममता ऐसी थी,
जैसी सर्दी में धूप का साथ ।

प्यारी लगती थी मुझको,
जैसे सावन की पहेली बरसात ।।

जी करता ऐ सब के मालिक,
आज मैं तेरे घर आ जाऊं ।

छीनकर अपनी माँ को तुझसे,
वापस अपने घर ले जाऊं..

14. सिलसिला ये दोस्ती काHindi Poem Competition for Class 2

Hindi Poem for Class 2

सिलसिला ये दोस्ती का हादसा जैसा लगे
फिर तेरा हर लफ़्ज़ मुझको क्यों दुआ जैसा लगे।

बस्तियाँ जिसने जलाई मज़हबों के नाम पर
मज़हबों से शख़्स वो इकदम जुदा जैसा लगे।

इक परिंदा भूल से क्या आ गया था एक दिन
अब परिंदों को मेरा घर घोंसला जैसा लगे

घंटियों की भाँति जब बजने लगें ख़ामोशियाँ
घंटियों का शोर क्यों न ज़लज़ला जैसा लगे।

बंद कमरे की उमस में छिपकली को देखकर
ज़िंदगी का ये सफ़र इक हौसला जैसा लगे।

15. मेरी नानी

नानी मेरी नानी
सारे जग से सयानी।

रोज सुनाती कहानी
कभी राजा कभी रानी

उनको याद जुबानी।
जब भी कोई तंग करता

डांट लगाती पुरानी।।

16. लाली है, हरियाली है

लाली है, हरियाली है,
रूप बहारो वाली यह प्रकृति,
मुझको जग से प्यारी है।

हरे-भरे वन उपवन,
बहती झील, नदिया,
मन को करती है मन मोहित।

प्रकृति फल, फूल, जल, हवा,
सब कुछ न्योछावर करती,
ऐसे जैसे मां हो हमारी।

हर पल रंग बदल कर मन बहलाती,
ठंडी पवन चला कर हमे सुलाती,
बेचैन होती है तो उग्र हो जाती।

कहीं सूखा ले आती, तो कहीं बाढ़,
कभी सुनामी, तो कभी भूकंप ले आती,
इस तरह अपनी नाराजगी जताती।

सहेज लो इस प्रकृति को कहीं गुम ना हो जाए,
हरी-भरी छटा, ठंडी हवा और अमृत सा जल,
कर लो अब थोड़ा सा मन प्रकृति को बचाने का।

….नरेंद्र वर्मा

17. बसंत का मौसमHindi Poem for Class 2 on Nature

Hindi Poem for Class 2

है महका हुआ गुलाब
खिला हुआ कंवल है,

हर दिल मे है उमंगे
हर लब पे ग़ज़ल है,

ठंडी-शीतल बहे ब्यार
मौसम गया बदल है,

हर डाल ओढ़ा नई चादर
हर कली गई मचल है,

प्रकृति भी हर्षित हुआ जो
हुआ बसंत का आगमन है,

चूजों ने भरी उड़ान जो
गये पर नये निकल है,

है हर गाँव मे कौतूहल
हर दिल गया मचल है,

चखेंगे स्वाद नये अनाज का
पक गये जो फसल है,

त्यौहारों का है मौसम
शादियों का अब लगन है,

लिए पिया मिलन की आस
सज रही “दुल्हन” है,

है महका हुआ गुलाब
खिला हुआ कंवल है…!!

….इंदर भोले नाथ

18. संभल जाओ ऐ दुनिया वालो

संभल जाओ ऐ दुनिया वालो
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !

रब करता आगाह हर पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!

लगा बारूद पहाड़, पर्वत उड़ाए
स्थल रमणीय सघन रहा नही !

खोद रहा खुद इंसान कब्र अपनी
जैसे जीवन की अब परवाह नही !!

लुप्त हुए अब झील और झरने
वन्यजीवो को मिला मुकाम नही !

मिटा रहा खुद जीवन के अवयव
धरा पर बचा जीव का आधार नहीं !!

नष्ट किये हमने हरे भरे वृक्ष,लताये
दिखे कही हरयाली का अब नाम नही !

लहलाते थे कभी वृक्ष हर आँगन में
बचा शेष उन गलियारों का श्रृंगार नही !

कहा गए हंस और कोयल, गोरैया
गौ माता का घरो में स्थान रहा नही !

जहाँ बहती थी कभी दूध की नदिया
कुंए,नलकूपों में जल का नाम नही !!

तबाह हो रहा सब कुछ निश् दिन
आनंद के आलावा कुछ याद नही

नित नए साधन की खोज में
पर्यावरण का किसी को रहा ध्यान नही !!

विलासिता से शिथिलता खरीदी
करता ईश पर कोई विश्वास नही !

भूल गए पाठ सब रामयण गीता के,
कुरान,बाइबिल किसी को याद नही !!

त्याग रहे नित संस्कार अपने
बुजुर्गो को मिलता सम्मान नही !

देवो की इस पावन धरती पर
बचा धर्म -कर्म का अब नाम नही !!

संभल जाओ ऐ दुनिया वालो
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !

रब करता आगाह हर पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!

….डी. के. निवातियाँ

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